हरतालिका तीज 2026: निर्जला व्रत नियम, पूजा सामग्री और शुभ समय

सोमवार, 14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज है। जानिए यही दिन क्यों, तृतीया तिथि का समय, पूजा के लिए शुभ घड़ी और निर्जला व्रत कैसे रखें।

UPDATED 2026-09-267 MIN READ
भोर की रोशनी में मिट्टी से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमा के सामने हरी चूड़ियाँ और हरी साड़ी पहने महिला दीपक जलाती हुई

हरतालिका तीज 2026 सोमवार, 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल तृतीया सुबह 7:08 बजे, 13 सितंबर 2026 से सुबह 7:07 बजे, 14 सितंबर 2026 तक रहेगी, और 14 सितंबर के सूर्योदय (सुबह 6:05 बजे) पर तृतीया होने से व्रत इसी दिन है। पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक (49 मिनट) है और राहु काल सुबह 7:38 बजे से सुबह 9:11 बजे तक टालें। समय नई दिल्ली (IST) के हैं।

KEY TAKEAWAYS
  • हरतालिका तीज 2026 का व्रत सोमवार, 14 सितंबर 2026 को है, क्योंकि उस दिन सूर्योदय के समय तृतीया तिथि है।
  • तृतीया तिथि सुबह 7:08 बजे, 13 सितंबर 2026 से सुबह 7:07 बजे, 14 सितंबर 2026 तक रहेगी।
  • दिन में पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक है, जबकि राहु काल सुबह 7:38 बजे से सुबह 9:11 बजे तक है।
  • निर्जला व्रत के नियम और पूजा विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकते हैं, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।

हरतालिका तीज 2026 किस दिन है और 13 नहीं, 14 सितंबर क्यों?

हरतालिका तीज सोमवार, 14 सितंबर 2026 को है। सभी समय नई दिल्ली के लिए (IST) हैं, अन्य शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। भाद्रपद शुक्ल तृतीया सुबह 7:08 बजे, 13 सितंबर 2026 को शुरू होकर सुबह 7:07 बजे, 14 सितंबर 2026 को समाप्त होगी। 13 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया शुरू नहीं हुई होती, जबकि 14 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6:05 बजे है और उस क्षण तृतीया चल रही होती है। यह पर्व उदया तिथि के नियम से मनाया जाता है, इसलिए व्रत का दिन 14 सितंबर है। ध्यान दें कि तिथि सुबह जल्दी समाप्त हो जाती है, इसलिए कई परिवार संकल्प और सुबह की पूजा सूर्योदय के बाद जल्दी करना पसंद करते हैं।

14 सितंबर को पूजा का शुभ समय क्या है?

दिन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक (49 मिनट) है, जिसे परंपरा में शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है। राहु काल सुबह 7:38 बजे से सुबह 9:11 बजे तक (1 घंटे 33 मिनट) है, इस दौरान नया पूजन आरंभ करने से लोग बचते हैं। सूर्यास्त शाम 6:28 बजे है; हरतालिका तीज की मुख्य पूजा कई जगह प्रदोष यानी सूर्यास्त के आसपास की जाती है, पर यह परंपरा परिवार के अनुसार बदलती है। अपने शहर का सटीक प्रदोष समय अपने स्थानीय पंचांग में देखें।

उस दिन का पंचांग कैसा है?

सूर्योदय के समय तिथि तृतीया है (सुबह 7:07 बजे, 14 सितंबर 2026 तक)। नक्षत्र चित्रा है (दोपहर 1:55 बजे, 14 सितंबर 2026 तक), योग ब्रह्म है (दोपहर 12:47 बजे, 14 सितंबर 2026 तक) और करण गर है (सुबह 7:07 बजे, 14 सितंबर 2026 तक)। चंद्रमा तुला राशि में है और चंद्रोदय सुबह 9:01 बजे होगा।

हरतालिका तीज क्यों मनाई जाती है?

लोक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, और उनकी सखियाँ उन्हें विवाह के एक और प्रस्ताव से बचाने के लिए वन में ले गई थीं। 'हरत' (हरण) और 'आलिका' (सखी) से ही इसका नाम हरतालिका पड़ा, ऐसा माना जाता है। इसलिए विवाहित महिलाएँ पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य के लिए, और अविवाहित कन्याएँ मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं। यह व्रत उत्तर भारत, राजस्थान, बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में प्रचलित है।

निर्जला व्रत कैसे रखा जाता है?

हरतालिका तीज का व्रत आम तौर पर निर्जला रखा जाता है, यानी पूरे दिन अन्न और जल दोनों का त्याग। व्रत कब से कब तक रहे, रात्रि जागरण हो या नहीं, और अगली सुबह व्रत किस प्रकार खोला जाए, यह परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होता है, इसलिए अपने घर की बड़ी महिलाओं या पुरोहित से पूछकर ही नियम तय करें। गर्भवती महिलाएँ, बुज़ुर्ग, या जिन्हें मधुमेह, रक्तचाप जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ हैं, वे बिना जल के व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें; श्रद्धा से रखा गया फलाहार या जलयुक्त व्रत भी भाव में कम नहीं माना जाता।

पूजा में आम तौर पर क्या-क्या सामग्री लगती है?

कई घरों में मिट्टी या बालू से शिव, पार्वती और गणेश की प्रतिमा बनाकर पूजा की जाती है। सामान्य रूप से फूल, बेलपत्र, धतूरा, दीपक, धूप, फल, मिठाई, कलश, और माता पार्वती के लिए सुहाग का सामान जैसे चूड़ियाँ, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी और चुनरी रखी जाती है। सामग्री की सूची और पूजा की विधि क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदलती है, इसलिए अपनी परंपरा के अनुसार तैयारी करें।

क्या यह दिन मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से भी खास है?

तीज का मुहूर्त किसी शहर में सबके लिए एक ही होता है, पर कोई अवधि आप पर कैसा असर डालती है, यह आपकी अपनी कुंडली पर निर्भर करता है। Melooha आपकी जन्म कुंडली के आधार पर इसे देख सकता है, और जहाँ उपाय सुझाए जाते हैं वे सरल और वैकल्पिक होते हैं।

CLASSICAL SOURCES
  • Swiss Ephemeris (planetary data)
  • Lahiri ayanamsa
  • Nirnaya Sindhu

Frequently Asked Questions

हरतालिका तीज सोमवार, 14 सितंबर 2026 को है।

तृतीया तिथि सुबह 7:08 बजे, 13 सितंबर 2026 से सुबह 7:07 बजे, 14 सितंबर 2026 तक है (नई दिल्ली समय)।

यह व्रत उदया तिथि से मनाया जाता है। 14 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6:05 बजे पर तृतीया चल रही होगी, इसलिए व्रत इसी दिन है।

राहु काल सुबह 7:38 बजे से सुबह 9:11 बजे तक है; इस दौरान नया पूजन आरंभ करने से परंपरागत रूप से बचा जाता है।

हाँ, परंपरा में अविवाहित कन्याएँ भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं। नियम परिवार के अनुसार तय करें।

व्रत खोलने का समय और विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होती है। अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें और अपने शहर के समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें।

Dr. Vineeta Chandrashekhar Phatak
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CHIEF ASTROLOGER · MELOOHA

Dr. Vineeta Chandrashekhar Phatak is a distinguished Vedic astrologer, scholar, and educator with over two decades of experience in the study and practice of Jyotish. She holds a PhD in Vedang Jyotish from K.K. Sanskrit University, with her doctoral research focused on the analytical study of Hindu marriage through Vedic astrology. A recipient of academic honours including a Gold Medal at the BA level and a Silver Medal in her M.A., Dr. Phatak has taught Jyotish at both undergraduate and postgraduate levels and has authored several books and scholarly works on Vedic astrology. She has been an astrological consultant since 2005 and has served as Chief Astrologer at Melooha since 2022, bringing together traditional Jyotish knowledge, rigorous analysis, and decades of practical experience to make astrological insights more meaningful and accessible.

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