श्रावण अमावस्या 2026: पितृ कर्म, तर्पण विधि और सावधानियां

शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को श्रावण अमावस्या है। तिथि का समय, तर्पण के लिए सुबह का महत्व और किन बातों से बचें, सब एक जगह।

UPDATED 2026-09-266 MIN READ
सुबह की हल्की रोशनी में नदी किनारे जल, तिल और कुश से पितरों को तर्पण अर्पित करते हाथ

श्रावण अमावस्या 2026 शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी, क्योंकि उस दिन सूर्योदय (सुबह 6:04 बजे) के समय अमावस्या तिथि रहती है। अमावस्या तिथि सुबह 10:33 बजे, 10 सितंबर 2026 से शुरू होकर सुबह 8:57 बजे, 11 सितंबर 2026 को समाप्त होगी। इसलिए 11 सितंबर को सूर्योदय से सुबह 8:57 बजे तक, लगभग 2 घंटे 53 मिनट, अमावस्या तिथि में स्नान, दान और तर्पण किया जा सकता है। समय नई दिल्ली (IST) के लिए हैं।

KEY TAKEAWAYS
  • श्रावण अमावस्या का दिन शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 है, क्योंकि सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहती है।
  • 11 सितंबर को अमावस्या तिथि सुबह 8:57 बजे समाप्त हो जाती है, इसलिए पितृ कर्म सुबह जल्दी करना उचित माना जाता है।
  • राहु काल सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक है, जिसमें नए शुभ कार्य टालने की परंपरा है।
  • तर्पण की विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होती है, अपने कुल की परंपरा का पालन करें।

श्रावण अमावस्या 2026 कब है और यह 11 सितंबर को ही क्यों है?

श्रावण अमावस्या शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को है। सभी समय नई दिल्ली के लिए (IST) हैं, अन्य शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। अमावस्या तिथि सुबह 10:33 बजे, 10 सितंबर 2026 को शुरू होती है और सुबह 8:57 बजे, 11 सितंबर 2026 को समाप्त होती है। 10 सितंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी चल रही होगी, जबकि 11 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6:04 बजे है और उस समय अमावस्या रहती है। उदया तिथि के नियम से स्नान-दान और पितृ कर्म की अमावस्या 11 सितंबर को मानी जाती है। पूर्णिमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में इसी अमावस्या का नाम अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से नाम मिला लें।

11 सितंबर 2026 का पंचांग क्या है?

सूर्योदय: सुबह 6:04 बजे। सूर्यास्त: शाम 6:31 बजे। चंद्रोदय: सुबह 6:02 बजे। तिथि: अमावस्या, सुबह 8:57 बजे, 11 सितंबर 2026 तक। नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी, दोपहर 1:16 बजे, 11 सितंबर 2026 तक। योग: साध्य, शाम 5:02 बजे, 11 सितंबर 2026 तक। करण: नाग, सुबह 8:57 बजे, 11 सितंबर 2026 तक। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों सिंह राशि में हैं। राहु काल: सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक (1 घंटे 34 मिनट)। अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:43 बजे तक (50 मिनट)।

तर्पण और पितृ कर्म किस समय करें?

चूंकि अमावस्या तिथि 11 सितंबर को सुबह 8:57 बजे समाप्त हो जाती है, इसलिए कई परिवार सूर्योदय (सुबह 6:04 बजे) के बाद और तिथि रहते हुए ही स्नान, तर्पण और दान पूरा करना पसंद करते हैं। कुछ परंपराओं में श्राद्ध या पिंडदान के लिए दोपहर का समय भी माना जाता है, जो तिथि बदलने के बाद आता है। ऐसे में आपके कुल में जो नियम चलता है, उसके लिए परिवार के पुरोहित या स्थानीय पंचांग से सलाह लें।

तर्पण सामान्यतः कैसे किया जाता है?

आम तौर पर लोग सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं, फिर जल में तिल मिलाकर पितरों का स्मरण करते हुए अर्पित करते हैं। कई जगह कुश का उपयोग होता है और दक्षिण दिशा की ओर मुख करने की परंपरा है। इसके बाद अन्न, वस्त्र या भोजन का दान किया जाता है। मंत्र, दिशा, सामग्री और क्रम परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं, इसलिए इसे सामान्य रूपरेखा समझें, कठोर नियम नहीं। जिनके पास विधि की जानकारी नहीं है, वे श्रद्धा से जल अर्पित करके और जरूरतमंद को भोजन देकर भी पितरों को याद करते हैं।

श्रावण अमावस्या पर किन बातों का ध्यान रखें?

तर्पण और दान को तिथि समाप्त होने (सुबह 8:57 बजे) से पहले पूरा करने की कोशिश करें। राहु काल (सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक) में नए शुभ कार्य शुरू करने से परंपरागत रूप से बचा जाता है। अमावस्या को सात्विक आचरण, संयम और विवाद से दूर रहने को महत्व दिया जाता है। खान-पान और अन्य निषेध परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हैं। यह सब पारंपरिक मार्गदर्शन है, इसे भय का कारण न बनाएं।

श्रावण अमावस्या का महत्व क्या है?

हर अमावस्या पितरों के स्मरण से जुड़ी मानी जाती है और श्रावण मास की अमावस्या वर्षा ऋतु के बीच आती है, जब प्रकृति, वृक्षारोपण और जल स्रोतों से जुड़ी परंपराएं भी कई क्षेत्रों में दिखती हैं। कई परिवार इसे पितरों के प्रति कृतज्ञता, दान और आत्मचिंतन का दिन मानते हैं। इसका पालन कैसे हो, यह क्षेत्रीय परंपरा पर निर्भर है।

CLASSICAL SOURCES
  • Swiss Ephemeris (planetary data)
  • Lahiri ayanamsa
  • Nirnaya Sindhu
  • Garuda Purana

Frequently Asked Questions

शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को, क्योंकि उस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहती है।

सुबह 10:33 बजे, 10 सितंबर 2026 से सुबह 8:57 बजे, 11 सितंबर 2026 तक (नई दिल्ली, IST)।

10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे के बाद अमावस्या शुरू होती है, पर उदया तिथि के नियम से स्नान-दान की अमावस्या 11 सितंबर को मानी जाती है। अपने कुल की परंपरा के अनुसार निर्णय लें।

सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक (1 घंटे 34 मिनट)।

सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:43 बजे तक (50 मिनट)।

Dr. Vineeta Chandrashekhar Phatak
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CHIEF ASTROLOGER · MELOOHA

Dr. Vineeta Chandrashekhar Phatak is a distinguished Vedic astrologer, scholar, and educator with over two decades of experience in the study and practice of Jyotish. She holds a PhD in Vedang Jyotish from K.K. Sanskrit University, with her doctoral research focused on the analytical study of Hindu marriage through Vedic astrology. A recipient of academic honours including a Gold Medal at the BA level and a Silver Medal in her M.A., Dr. Phatak has taught Jyotish at both undergraduate and postgraduate levels and has authored several books and scholarly works on Vedic astrology. She has been an astrological consultant since 2005 and has served as Chief Astrologer at Melooha since 2022, bringing together traditional Jyotish knowledge, rigorous analysis, and decades of practical experience to make astrological insights more meaningful and accessible.

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